प्रदोष व्रत 2026
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 16जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 14फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 1मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 16मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 30मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 15अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 28अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 14मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 28मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 12जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 12जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 26जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 10अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 25अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 8सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 8अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 23अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 6नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 6दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 21दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2026 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला गुरु प्रदोष (गुरुवार, 1 जनवरी 2026), अंतिम सोम प्रदोष (21 दिसंबर 2026)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।