रत्न धारण के नियम: कब और कैसे पहनें
Gemstone Rules: When & How to Wear
रत्न धारण वैदिक ज्योतिष में एक शक्तिशाली उपचार पद्धति है, परन्तु गलत रत्न धारण करना अत्यंत हानिकारक हो सकता है। प्रत्येक रत्न किसी न किसी ग्रह से सम्बन्धित होता है और उस ग्रह की ऊर्जा को प्रबल करता है। यदि वह ग्रह आपकी कुंडली में शुभ है तो रत्न लाभकारी होगा, परन्तु यदि वह ग्रह अशुभ है तो वही रत्न आपके लिए समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। इसलिए बिना कुंडली विश्लेषण के कोई भी रत्न नहीं पहनना चाहिए।
माणिक (Ruby) सूर्य का रत्न है — यह नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सरकारी कार्यों में सफलता देता है। मोती (Pearl) चंद्र का रत्न है — मानसिक शांति, माता से सुख और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है। मूंगा (Red Coral) मंगल का रत्न है — साहस, भूमि सम्पत्ति और शारीरिक शक्ति बढ़ाता है। पन्ना (Emerald) बुध का रत्न है — बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता देता है। पुखराज (Yellow Sapphire) गुरु का रत्न है — ज्ञान, धन, विवाह और सन्तान सुख देता है।
हीरा (Diamond) शुक्र का रत्न है — वैभव, कला, वैवाहिक सुख और भौतिक सम्पन्नता प्रदान करता है। नीलम (Blue Sapphire) शनि का रत्न है — यह सबसे तेज़ प्रभाव देने वाला रत्न है और बहुत सावधानी से धारण करना चाहिए। गोमेद (Hessonite) राहु का रत्न है — यह अचानक लाभ, विदेश यात्रा और रहस्यमय शक्तियों से सम्बन्धित है। लहसुनिया (Cat's Eye) केतु का रत्न है — यह आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष मार्ग से जुड़ा है।
रत्न धारण के कुछ सामान्य नियम हैं जिनका पालन अवश्य करें। रत्न हमेशा शुभ मुहूर्त में धारण करें — सम्बन्धित ग्रह के दिन और होरा में। रत्न को पहनने से पूर्व गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें और सम्बन्धित ग्रह के मंत्र का 108 बार जाप करें। रत्न की अंगूठी उचित धातु में बनवाएँ — जैसे माणिक सोने में, मोती चाँदी में, नीलम पंचधातु में। रत्न का वज़न भी महत्वपूर्ण है — सामान्यतः 3 से 7 रत्ती का रत्न उपयुक्त होता है। Jyotish Jagat की दुकान पर सभी रत्न प्रमाणित और ऊर्जाकृत उपलब्ध हैं।